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लेखन शैली व्यक्तित्व का दर्पण

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writting_styleलेखन शैली व्यक्तित्व का दर्पण होता है,  हम व्यक्ति के सामाजिक व्यवहार को तीन श्रेणियों में विभाजित कर सकते हैं :
1. बहिर्मुखी व्यक्तित्व,
2. अन्तर्मुखी व्यक्तित्व और
3. मघ्यस्थ व्यक्तित्व

बहिर्मुखी व्यक्तित्व वाला व्यक्ति समाज में प्रत्येक व्यक्ति के साथ मानसिक और संवेदनशील रूप से बिल्कुल एक होकर कार्य करता है। कभी भी आराम नहीं करना चाहता हैं, क्योंकि समाज सेवा ही उकसा घर्म होता है और उसे संतुष्टि ही सामाजिक कार्यो से प्राप्त होती है। ऎसा व्यक्ति थोडा भारी हाथ से लिखता है और इसकी लिखावट दायीं और झुकती हुई होती है। अक्षर बडे-बडे और लिखावट गोलाई लिए होती है, यदि बडे अक्षर भारी दबाव के साथ लिखे गये हैं तो व्यक्ति समाज से यह भी चाहता है कि उसका घ्यान रखा जाए।

अन्तर्मुखी व्यक्तित्व वाले व्यक्ति बचपन में उपेक्षा का शिकार समाज की उदासीनता से खिन्न आदि वजहों से अन्तर्मुखी कहलाते हैं। यह मनुष्य के प्रति विपरीत व्यवहार रखते हैं तथा सामाजिक व्यवहार को भी कोई मान्यता नहीं देते। ऎसे व्यक्तियों की लिखावट बायीं ओर झुकी होती है तथा भारी दबाव से लिखी होती है। यह व्यक्ति किसी से अपने मन की बात आसानी से नहीं कहते, शंकालु स्वभाव के होते हैं। ऎसे व्यक्ति दृढ निश्चयी होते हैं। कोई इनका निर्णय बदल नहीं सकता। यह मुसीबत में घबराते नहीं हैं, शांत रहते हैं।

जिनकी लिखावट सीघी होती है वह मघ्यस्थ व्यक्ति कहलाते हैं। ज्यादातर लोग इसी श्रेणी में आते हैं। सीघी लिखावट लगभग सभी चिन्ह सही स्थान पर लगे हुए लिखावट का झुकाव हमें व्यक्ति की निजी सोच और व्यवहार के बारे में बतालाता है। झुकाव से हमें यह भी पता चलता है कि व्यक्ति दिखावा करने वाला है या संकोची है, बातूनी है या शांत प्रकृति का है। ऎसा देखा गया है कि अघिकतर लोग सीघा लिखते हैं और इस शैली के अनुसार वर्तमान में ही जीते हैं। यह बडे आत्म-विश्वासी होते हैं तथा स्वतंत्र रूप से चिंतन करते हैं। इनकी निर्णय लेने की क्षमता भी अच्छी होती है। जिनकी लिखावट का झुकाव दायीं और होता है वह व्यक्ति बहिर्मुखी तो होते ही हैं बल्कि सामाजिक प्रवृत्ति और व्यवहार कुशलता का पुट भी इनमें रहता है लेकिन सामाजिक प्रकृति होने के कारण यह समाज से अपने सामाजिक कार्यो की प्रशंसा की अपेक्षा भी रखते हैं। कर्मशील, भविष्य बनाने की चिंता तथा सदा कुछ न कुछ क्रियात्मक करते हुए आगे बढते रहने की इच्छा रहती है। भावनात्मक प्रवृत्ति होने के कारण लोगों के प्रति संवेदनशील होते हैं तथा उनके बीच रहना भी पसंद करते हैं। यदि व्यक्ति की लिखावट का झुकाव बायीं ओर होता है तो व्यक्ति शांत एवं अकेला जीवन जीने की इच्छा रखता है। ऎसे व्यक्ति संवेदनशील होने के अलावा डरपोक भी होते हैं। अपने बनाए हुए सीमित दायरे से यह व्यक्ति बाहर नहीं निकल पाते जिसके फलस्वरूप आसानी से मित्र नहीं बना पाते तथा किसी से प्रभावित भी नहीं होते हैं। अन्तर्मुखी व्यक्ति होने के कारण ऎसे व्यक्ति सदा परिस्थितियों के बारे में सोचते रहते हैं। इनके विचारों में अनेक अन्तर्द्वन्द्व चलते दिखाई पडते हैं। यदि व्यक्ति अपनी लिखावट आये दिन बदलते हैं तो यह ठीक नही हैं क्योंकि लिखावट का बार-बार बदलना उनकी मानसिक स्थिति का परिचायक है जो कि अस्थिर होने के साथ-साथ अनियंत्रित भी होती है।


 

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